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इमरान खान को जेल से अस्पताल भेजने पर शहबाज सरकार ने मांगा पुनर्विचार: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पाकिस्तान में फिर बढ़ा सियासी तनाव

सरकार बोली- प्राइवेट अस्पताल भेजने से कानूनी और सुरक्षा संबंधी दिक्कतें बढ़ेंगी; इमरान के वकील ने कहा- नया आदेश आने तक कोर्ट के फैसले का पालन जरूरी

ISLAMABAAD : पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को लेकर एक बार फिर सियासी और कानूनी टकराव बढ़ गया है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की है, जिसमें इमरान खान को जेल से निकालकर प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराने का निर्देश दिया गया था। कोर्ट ने मंगलवार को इमरान को 48 घंटे के भीतर इस्लामाबाद के शिफा अस्पताल में भर्ती कराने का आदेश दिया था। सरकार के इस कदम के बाद पाकिस्तान में इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और सरकार के बीच विवाद और गहरा गया है। सरकार का तर्क है कि इमरान सजायाफ्ता कैदी हैं और उन्हें जेल मैनुअल के तहत ही चिकित्सा सुविधा दी जानी चाहिए।


सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा

शहबाज शरीफ सरकार का कहना है कि इमरान खान को प्राइवेट अस्पताल में स्थानांतरित करने से कई कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े हो सकते हैं। सरकार के मंत्रियों ने यह भी आशंका जताई कि अगर एक कैदी को इस तरह अस्पताल भेजने की अनुमति मिलती है, तो दूसरे कैदी भी इसी आधार पर ऐसी मांग कर सकते हैं। सरकार की ओर से यह तर्क भी दिया गया कि इमरान खान के जेल से बाहर आने की स्थिति में उनके समर्थकों के सड़कों पर उतरने और राजनीतिक माहौल बिगड़ने की आशंका है।


बहन नूरीन नियाजी ने जेल में की मुलाकात

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद इमरान खान के परिवार को उनसे मुलाकात की अनुमति दी गई। उनकी बहन नूरीन नियाजी ने बुधवार को अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। रिपोर्ट के मुताबिक करीब नौ महीने बाद उन्हें अपने भाई से मिलने की अनुमति मिली। इमरान की पत्नी बुशरा बेगम भी अडियाला जेल में बंद हैं। दोनों को अलग-अलग बैरक में रखा गया है। बुधवार को दोनों की जेल के कॉमन हॉल में मुलाकात भी कराई गई, हालांकि, कोर्ट ने परिवार से मुलाकात के बाद मीडिया से इमरान की सेहत या मुलाकात को लेकर सार्वजनिक बयान नहीं देने की शर्त रखी थी।

सरकार बोली- इमरान को नहीं मिलेगा स्पेशल ट्रीटमेंट

पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने इमरान के समर्थकों को लेकर कहा कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। वहीं गृह मंत्री तलाल चौधरी ने कहा कि इमरान खान को अदालत ने सजा सुनाई है और उन्हें जेल नियमों के अनुसार ही इलाज दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इमरान को विशेष सुविधा देने से दूसरे कैदियों के लिए भी ऐसी मांगों का रास्ता खुल सकता है।


इमरान के वकील ने सरकार को दी चेतावनी

इमरान खान के वकील सलमान अकरम राजा ने सरकार के पुनर्विचार आवेदन पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सिर्फ रिव्यू पिटीशन दाखिल करने से सुप्रीम कोर्ट का मौजूदा आदेश खत्म नहीं हो जाता। उनका कहना है कि जब तक कोर्ट अपने आदेश में बदलाव नहीं करता, सरकार को निर्धारित समयसीमा के भीतर इमरान को अस्पताल में शिफ्ट करना होगा। PTI नेताओं का आरोप है कि सरकार राजनीतिक कारणों से इमरान खान को जेल से बाहर नहीं देखना चाहती।

विपक्ष और धार्मिक नेताओं ने भी सरकार को घेरा

इमरान खान के इलाज को लेकर पाकिस्तान में विपक्षी दलों और धार्मिक नेताओं की ओर से भी सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के नेता मौलाना फजलुर रहमान ने कहा कि किसी व्यक्ति की सेहत को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाया जाना चाहिए। वहीं शिया मौलाना अल्लामा नासिर अब्बास ने भी सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि जब अदालत ने इमरान के इलाज को लेकर स्पष्ट आदेश दे दिया है तो सरकार को उसका पालन करना चाहिए।

बिलावल भुट्टो ने भी जताई चिंता

सरकार में सहयोगी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी इमरान खान की सेहत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इमरान का बेहतर इलाज सुनिश्चित होना चाहिए और बेहतर होता कि यह मामला अदालत तक पहुंचने से पहले ही सुलझा लिया जाता। अब पूरे मामले की नजर सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अदालत सरकार की पुनर्विचार याचिका स्वीकार कर अपने पुराने आदेश में बदलाव करेगी या शहबाज शरीफ सरकार को इमरान खान को प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करना ही पड़ेगा।

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